॥ जनक-अष्टावक्र संवाद ॥
अष्टावक्र गीता
महर्षि अष्टावक्र और राजा जनक का संवाद — आत्मज्ञान पर बीस अध्यायों में सम्पूर्ण विस्तृत हिन्दी व्याख्या, श्लोक-दर-श्लोक। नीचे किसी भी अध्याय पर जाकर पढ़ें।

1अध्याय १आत्मज्ञान का उपदेश2अध्याय २आत्मानुभव का आनन्द3अध्याय ३आत्मज्ञान की परीक्षा4अध्याय ४आत्मज्ञान की महिमा5अध्याय ५विलय के चार मार्ग6अध्याय ६उच्चतर ज्ञान7अध्याय ७आत्मज्ञान का स्वभाव8अध्याय ८बंधन और मुक्ति9अध्याय ९वैराग्य10अध्याय १०शान्ति11अध्याय ११विवेक-ज्ञान12अध्याय १२आत्मा में स्थिति13अध्याय १३सुख14अध्याय १४शान्ति15अध्याय १५आत्म-ज्ञान16अध्याय १६विशेष उपदेश17अध्याय १७सच्चा ज्ञानी18अध्याय १८परम शान्ति19अध्याय १९आत्मा में विश्राम20अध्याय २०जीवन-मुक्ति
